Description
“सिंहाही का प्रतिशोध” वेद प्रकाश काम्बोज की एक जबरदस्त बदला-कथा है जो जमींदारी अहंकार, दबी हुई दुश्मनी, और गांव की मिट्टी में छिपे खून के इतिहास को उजागर करती है।
“सिंहाही का प्रतिशोध” एक ऐसा उपन्यास है जिसमें पाठक को गांव के सादे जीवन में छुपी भयंकर साज़िशें, और बदले की आग में तपते इंसानों की झलक मिलती है। यह कहानी सिखाती है कि समय चाहे जितना बीत जाए, सच्चाई और अन्याय का हिसाब एक दिन ज़रूर होता है।



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