Description
“चक्कर पे चक्कर” वेद प्रकाश काम्बोज की एक ऐसी धमाकेदार जासूसी कहानी है, जिसमें हर मोड़ पर एक नया मोड़ है—हर सच के पीछे छिपा है एक और झूठ, और हर किरदार के पीछे एक और चेहरा।
‘चक्कर पे चक्कर’ सिर्फ एक केस की बात नहीं है—यह एक मानसिक भूलभुलैया है, जहाँ पाठक भी खुद को जासूस समझने लगता है, लेकिन अंत तक लेखक उसे चौंकाता रहता है।



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