Description
चार दोस्त…
चारों बेरोज़गार…
चारों चालाक…
और चारों मिलकर बनाते हैं ऐसी चांडाल चौकड़ी, जो समाज को भी हिलाकर रख देती है!
“चांडाल चौकड़ी” एक मज़ेदार, तीखा और तीव्र गति से चलता उपन्यास है, जिसमें लेखक ‘चन्दर’ ने हास्य, व्यंग्य, सामाजिक विडंबना और हल्के-फुल्के अपराध का अनोखा मिश्रण पेश किया है।



Reviews
There are no reviews yet.