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Rare Collection / दुर्लभ संग्रह

KAMBOJNAMA

काम्बोजनामा

‘कांबोजनामा’ हिंदी पल्प और जासूसी साहित्य के लोकप्रिय लेखक वेद प्रकाश कांबोज के व्यक्तित्व, लेखन और साहित्यिक यात्रा को समर्पित एक रोचक संस्मरणात्मक कृति है। राम ‘पुजारी’ ने लेखक के साथ अपने अनुभवों, मुलाकातों और उनसे जुड़ी स्मृतियों के माध्यम से कांबोज जी के उस व्यक्तित्व को सामने रखा है, जिसने दशकों तक हिंदी के लाखों पाठकों को अपनी कहानियों और उपन्यासों से बांधे रखा।

पुस्तक में कांबोज जी के लेखन की लोकप्रियता, उनके प्रसिद्ध पात्रों, हिंदी पल्प साहित्य के बदलते दौर और पाठकों के साथ उनके गहरे जुड़ाव की झलक मिलती है। साथ ही, इसमें उस समय के साहित्यिक वातावरण, प्रकाशन जगत और लोकप्रिय साहित्य की दुनिया से जुड़े अनेक रोचक प्रसंग भी हैं।

‘कांबोजनामा’ उन पाठकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिन्होंने वेद प्रकाश कांबोज के उपन्यास पढ़कर अपने जीवन का एक यादगार साहित्यिक दौर जिया है और हिंदी पल्प साहित्य के इतिहास को करीब से जानना चाहते हैं।

Rare Collection / दुर्लभ संग्रह

Ghalib Badnaam

ग़ालिब बदनाम

“ग़ालिब बदनाम” महशूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब के जीवन को अद्भुत तरीके से बयां करती है। इसमें ग़ालिब खुद अपनी कहानी कह रहे हैं। वे कौनसी वजहें थी जिनसे उन्हें कभी अंग्रेजो का वफादार तो कभी अलग अलग बातों से बदनाम किया गया। वेदप्रकाश काम्बोज की कलम हमें उस दुनिया में ले जाती है जहाँ ग़ालिब अपने सारे पन्ने खोलते हैं।

18 साल की उम्र में पहला जासूसी उपन्यास लिखकर लोकप्रिय साहित्य में सिक्का जमाने वाले वेदप्रकाश काम्बोज ने सैकड़ों जासूसी उपन्यास लिखे और साठ-सत्तर के दशक में रघुनाथ-विजय जैसे चरित्रों को यादगार बना दिया। अपनी दूसरी पारी में उन्होंने जासूसी इलाका छोड़ा, ऐतिहासिक विषयों पर लिखना शुरू कर दिया ।

‘ग़ालिब बदनाम’ की शैली मिर्ज़ा ग़ालिब की ही तरफ से लिखे गए बयान की तरह है जिसमें कुछ अनछुए पहलुओं की परतें खुलती हैं।

दिलचस्पी बनाये रखने में माहिर लेखक की यह अपने तरह की पहली और पठनीय पेशकश है

₹320.00

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