Description
साँप और सीढ़ी सिर्फ़ एक खेल नहीं, बल्कि अपराध, सत्ता और विश्वासघात की उस खतरनाक दुनिया का प्रतीक है जहाँ हर सीढ़ी के नीचे एक ज़हरीला साँप छिपा है। कलकत्ता की यात्रा पर निकला जगत अचानक पटना पहुँच जाता है और एक ऐसे रहस्य में उलझ जाता है, जिसकी डोर रोहतासगढ़ के रहस्यमय किले, खूंखार डाकुओं, राजनीतिक संरक्षण और संगठित अपराध से जुड़ी है। हर कदम उसे नए खतरे की ओर ले जाता है, जहाँ दोस्त और दुश्मन की पहचान भी धुंधली हो जाती है। क्या जगत इस रहस्यमयी खेल का अंत खोज पाएगा, या स्वयं उसी का शिकार बन जाएगा? रोमांच, रहस्य और तेज़ रफ्तार घटनाओं से भरपूर यह उपन्यास पाठक को अंतिम पृष्ठ तक बाँधे रखता है।



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