Description
लखनऊ के प्रतिष्ठित नवाब परिवार का युवा अनवर अली अपनी सबसे करीबी दोस्त की पत्नी की हत्या का अपराध स्वयं स्वीकार कर लेता है। पुलिस के पास सबूत भी हैं और उसकी स्वीकारोक्ति भी, इसलिए मामला बिल्कुल साफ दिखाई देता है। लेकिन तभी केन्द्रीय खुफिया विभाग का तेज़-तर्रार जासूस चेतन इस निष्कर्ष पर विश्वास करने से इंकार कर देता है। जितनी गहराई से वह जाँच करता है, उतनी ही रहस्य की परतें खुलती जाती हैं—ऐसे प्रमाण सामने आते हैं जो साबित करते हैं कि अनवर अपराधी हो ही नहीं सकता। फिर वह अपने ही गले में फाँसी का फंदा क्यों डाल रहा है? आखिर ‘रूपमहल का कैदी’ कौन है, और इस रहस्य के पीछे छिपा सच क्या है? ओम प्रकाश शर्मा का यह रोमांचक जासूसी उपन्यास रहस्य, भावनाओं और अप्रत्याशित मोड़ों से भरपूर है, जो पाठक को अंतिम पृष्ठ तक बाँधे रखता है।



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