Description
एक रियासती नगर, एक रहस्यमय हत्या और शक के घेरे में खड़े कई चेहरे—मैडम सुमित्रा में जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा जासूस जगन और बन्दूक सिंह को ऐसे मामले में उतारते हैं, जहाँ हर सच आधा और हर चेहरा नक़ाब ओढ़े है। एक प्रतिष्ठित परिवार, सत्ता, मजदूर आंदोलन और छिपी हुई निजी दुश्मनियाँ—सब मिलकर साज़िश का जाल रचते हैं। क्या मैडम सुमित्रा केवल परिस्थितियों की शिकार है, या पूरी कहानी की धुरी? तेज़ रफ्तार कथानक, धारदार संवाद और चौंकाने वाले मोड़ों से भरा यह उपन्यास पाठक को अंत तक बाँधे रखता है।



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