Description
तीन लोग अचानक ग़ायब—एक औरत, उसका भाई और उसका पति। मामला साधारण अपहरण का लगता है, लेकिन परतें खुलते ही राजनीति, सत्ता और अपराध का खौफनाक गठजोड़ सामने आता है। तीन ग़ायब में जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा जासूस जगन और बन्दूक सिंह को ऐसे रहस्य में उलझाते हैं, जहाँ हर गवाह झूठा, हर सच अधूरा और हर ताक़तवर बेदाग दिखता है। क्या ये ग़ायब लोग ज़िंदा हैं, या साज़िश ने उन्हें निगल लिया? तेज़ रफ्तार कथानक, तीखे संवाद और चौंकाने वाले मोड़ों से भरा यह उपन्यास आख़िरी पन्ने तक बाँधे रखता है।



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