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Description

महान साहित्यकार सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का उपन्यास ‘अलका’ नारी संघर्ष, आत्मसम्मान और सामाजिक अन्याय की मार्मिक कथा है। महामारी में माता-पिता को खोने के बाद शोभा असहाय हो जाती है। एक प्रभावशाली जमींदार के षड्यंत्र और शोषण से बचकर वह साहसपूर्वक अपने जीवन की नई राह तलाशती है। स्नेहशंकर का संरक्षण उसे ‘अलका’ के रूप में नई पहचान देता है।
निराला ने इस उपन्यास में सामंती व्यवस्था, सामाजिक रूढ़ियों, आर्थिक विषमता और स्त्री की स्वतंत्रता के प्रश्नों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। हिंदी साहित्य के प्रेमियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण क्लासिक रचना है।