Skip to content

₹275.00

Category:

Description

“ज़ुल्म और नहीं” ओमप्रकाश शर्मा द्वारा रचित एक जोशीला और भावनात्मक जासूसी उपन्यास है, जो अन्याय, अत्याचार और व्यवस्था के खिलाफ उठती एक आम इंसान की आवाज़ को दर्शाता है। यह कहानी उस क्षण से शुरू होती है जब एक मजबूर इंसान कह उठता है —
“बस! अब और नहीं… ज़ुल्म और नहीं!”

“ज़ुल्म और नहीं”
एक नारा है,
एक चेतावनी है उन सबके लिए जो समझते हैं
कि आम आदमी कुछ नहीं कर सकता।

क्योंकि जब सहनशीलता की हद पार हो जाती है,
तब जन्म होता है बगावत का…
और बगावत कहती है — अब ज़ुल्म और नहीं!