Description
“दो भद्र पुरुष” गुरुदत्त का एक गहराई से विचारोत्तेजक और नैतिकता-आधारित उपन्यास है, जो दो ऐसे सज्जन पुरुषों की कहानी कहता है—जो दिखने में समान रूप से भले, शिक्षित और सभ्य हैं, लेकिन उनकी सोच, जीवन मूल्य और कर्मों में गहरा अंतर है।
दो भद्र पुरुष” एक ऐसा उपन्यास है जो आपको अंत तक सोचने को मजबूर करेगा कि—कौन सच में भद्र है? और क्यों?



Reviews
There are no reviews yet.