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“संपदा” गुरुदत्त द्वारा लिखा गया एक गंभीर सामाजिक और दार्शनिक उपन्यास है, जो यह सवाल उठाता है कि सच्ची “संपदा” क्या है?—धन-दौलत या मानवीय मूल्यों, आत्म-संतोष और रिश्तों की गर्माहट?

“संपदा” सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि पाठक के मन में यह सवाल छोड़ जाती है कि — आपकी असली संपदा क्या है?