Description
प्रेमचंद का उपन्यास “प्रेमाश्रम” भारतीय समाज में व्याप्त सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अन्याय की पड़ताल करता है। कहानी के केंद्र में ज्वाला प्रसाद, प्रभाशंकर और ज्ञानशंकर जैसे पात्र हैं, जो किसान और जमींदार वर्ग के बीच संघर्ष को दर्शाते हैं। यह उपन्यास किसानों के संघर्ष, जमींदारों के शोषण और ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों का यथार्थवादी चित्रण प्रस्तुत करता है। प्रेमचंद बताते हैं कि अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध कैसे सामाजिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। “प्रेमाश्रम” सामाजिक सुधार का संदेश देता है और मानवता, समानता और सत्य के आदर्शों से मेल खाता है। यह स्वतंत्रता-पूर्व भारत के ग्रामीण जीवन का सजीव चित्रण प्रस्तुत करता है।



Reviews
There are no reviews yet.