Description
सत्ता, षड्यंत्र, लालच और रहस्य के भंवर में फँसी एक ऐसी कहानी, जहाँ सच और झूठ के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है। एक मंत्री पर अपने कर्मचारी बाबू सिंह की हत्या का सनसनीखेज आरोप है, जबकि उसकी पत्नी कावेरी न्याय की गुहार लगा रही है। मामले की तह तक पहुँचने के लिए केंद्रीय खुफिया विभाग के निर्भीक जासूस जगन और बन्दूक सिंह मैदान में उतरते हैं। लेकिन जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ती है, हर सुराग एक नया रहस्य और हर चेहरा एक नया मुखौटा बनकर सामने आता है। क्या बाबू सिंह सचमुच मर चुका है, या पर्दे के पीछे कोई और ही खेल चल रहा है? “दो प्रेत” एक रोमांचकारी जासूसी उपन्यास है जो अंतिम पृष्ठ तक पाठक को बाँधे रखता है।



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