Description
एक हत्या… एक बड़ी डकैती… और एक ऐसा आदमी, जिसे पुलिस दोनों अपराधों का जिम्मेदार मान रही है। देहरादून के एक होटल में प्रसिद्ध जौहरी लक्ष्मण भाई की रहस्यमय हत्या हो जाती है। उसके पास मौजूद लाखों के जेवर और नकदी गायब हैं। घटनास्थल से मिले कुछ सुराग पुलिस को सीधे दिल्ली के कारोबारी नन्दलाल तक ले जाते हैं। लेकिन नन्दलाल का दावा है कि वह उस रात देहरादून में था ही नहीं। जब कानून का शिकंजा उसके चारों ओर कसने लगता है, वह मदद के लिए पहुंचता है जासूस एंड कम्पनी के पास। अब इस उलझी हुई गुत्थी को सुलझाने की जिम्मेदारी है तेज-तर्रार जासूस कमल और दिलचस्प अंदाज़ वाले नवाब बेअसर की। एक तरफ पुलिस के पास नन्दलाल के खिलाफ कई सुराग हैं—दूसरी तरफ कमल को यकीन है कि कहानी जितनी सीधी दिखाई दे रही है, उतनी है नहीं। होटल का बंद कमरा, हत्या के निशान, नकली पहचान, संदिग्ध लोगों की आवाजाही और अपराध के पीछे छिपी एक गहरी साजिश… आखिर लक्ष्मण भाई का असली कातिल कौन है? क्या नन्दलाल सचमुच निर्दोष है या यह पूरी कहानी उसकी अपनी चाल है? और सबसे बड़ा सवाल—डकैती और हत्या के पीछे छिपा असली रहस्य क्या है? पन्ना-दर-पन्ना बढ़ता रोमांच, रहस्य और जासूसी की दिलचस्प परतें इस कहानी को अंत तक बांधे रखती हैं। “होटल में डकैती” — एक ऐसी रहस्य-कथा, जिसमें हर सुराग आपको एक नए शक की ओर ले जाता है।



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