Description
चम्बल के बीहड़ों में फिर गूंज उठी गोलियों की आवाज मखना बागी एक खूंखार डाकू एक आतंकित गाँव और एक ऐसा खूनी खेल, जिसमें रिश्ते, इंसानियत और कानून सब बंधक बन जाते हैं! एक मासूम बच्चे की चीख मौत का नंगा नाच और बदले की ऐसी आग, जो पूरे बीहड़ को जला सकती है! जब पुलिस बेबस हो जाए जब गाँव वालों की साँसें थम जाएँ तब मैदान में उतरता है भोलाशंकर ! क्या “लोहे के कंगन” सिर्फ एक गहना हैं या मौत की वो जंजीर, जिससे बच निकलना नामुमकिन है? रहस्य, रोमांच, गोलीबारी, डाकू, आतंक, जासूसी का विस्फोट ! पढ़िए – “लोहे के कंगन” केवल नीलम जासूस कार्यालय से।



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