Description
रेत की दीवार चार लाख रुपये… एक के बाद एक रहस्यमयी हत्याएँ… और हर बार शक की सुई एक ही निर्दोष इंसान पर आकर ठहर जाती है। दौलतराम जितना सच से भागना चाहता है, उतना ही वह मौत और षड्यंत्र के जाल में फँसता जाता है। हर कदम पर कोई अदृश्य दुश्मन उसका पीछा कर रहा है, और हर नया सुराग उसे एक और भयावह रहस्य के सामने खड़ा कर देता है। अब इस उलझी हुई गुत्थी को सुलझाने की जिम्मेदारी है मेजर बलवन्त पर। लेकिन क्या वे उस साजिश का पर्दाफाश कर पाएँगे, जिसकी नींव रेत की दीवार की तरह दिखाई तो देती है, पर हाथ आते ही बिखर जाती है? रहस्य, रोमांच और अप्रत्याशित मोड़ों से भरपूर यह उपन्यास आपको अंतिम पृष्ठ तक बाँधे रखेगा।



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