Description
रंगभूमि प्रेमचंद का गहन सामाजिक उपन्यास है, जिसका केंद्र अंधा भिखारी सूरदास है, जो अत्याचार, लोभऔर औपनिवेशिक सत्ता के सामने सत्य, करुणा और मानवीय मूल्यों का प्रतीक बनकर खड़ा होता है। अंग्रेज़ साहब जॉन सेवक सूरदास की जमीन हड़पकर वहां कारखाना बनाना चाहते हैं, पर सूरदास अडिग रहता है। उसकी संघर्षशीलता पूरे समाज को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देती है। उपन्यास सामन्तवाद, पूँजीवाद, धार्मिक पाखंड और सामाजिक विसंगतियों पर तीखा प्रहार करते हुए मानवता और नैतिकता की “आखिरी आवाज़ को सामने लाता है।



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