Description
मौत के व्यापारी एक रहस्यमय व्यक्ति गोलियों से छलनी हालत में मेजर बलवंत के दफ्तर तक पहुँचता है और दम तोड़ देता है। उससे पहले आए दो गुप्त फोन-एक धमकी, एक चेतावनी- इस घटना को और भी रहस्यमय बना देते हैं। मरने से पहले उसके होंठों पर बस एक अधूरा संकेत और मुट्ठी में छिपा एक रहस्यमय गत्ते का टुकड़ा ! जाँच आगे बढ़ती है तो खुलता है एक ऐसा जाल, जिसमें जासूसी, ब्लैकमेल, अतीत के पाप, और खतरनाक साजिशें उलझी हुई हैं। जुगलकिशोर भार्गव का नाम सामने आते ही मामला साधारण हत्या से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की गुत्थी बन जाता है। कौन हैं वे “मौत के व्यापारी” जो इंसानी जिंदगियों से खेल रहे हैं? क्या यह केवल व्यक्तिगत दुश्मनी है या किसी बड़े षड्यंत्र की शुरुआत ? मेजर बलवंत को न केवल एक खतरनाक अपराधी गिरोह का सामना करना है, बल्कि सच और छल के बीच की महीन रेखा को भी पहचानना है- जहाँ हर चेहरा भरोसे के लायक नहीं और हर मदद के पीछे कोई मकसद छिपा है। रोमांच, रहस्य, धोखे और तेज-तर्रार घटनाओं से भरपूर यह उपन्यास पाठक को आखिरी पन्ने तक बाँधे रखता है। “मौत के व्यापारी” एक ऐसी कहानी जहाँ हर कदम पर मौत साया बनकर साथ चलती है और सच की तलाश ही सबसे बड़ा जोखिम बन जाती है।



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