Description
कहानी एक ‘घेरा बंदी’ ऑपरेशन से आरंभ होती है — पुलिस या खुफिया एजेंसी कई संदिग्ध अपराधियों या आतंकवादियों की गतिविधियों पर नज़र रखती है।
“घेरा बंदी” एक पुरानी, लेकिन बेहद मनोरंजक और मजबूत सामाजिक–क्राइम थ्रिलर है, जिसमें पुलिस-खुफिया रणनीतियाँ, डबल एजेंट्स, घात–प्रतिघात और एक साधारण–आम शहर में छुपी गहरी साज़िश को प्रस्तुत करने का काम्बोज का पारंपरिक अंदाज़ साफ दिखता है। यदि आप को ‘विजय–रघुनाथ’ शृंखला पसंद है, और ‘षड़यंत्र’ तथा ‘घात’ की पड़ताल करने वाले थ्रिलर रूचिकर लगते हैं, तो यह उपन्यास पढ़ने लायक है।



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