Description
मेजर बलवंत सीरीज बहिन की आबरु जो भाई अपनी बहिन की आबरू लूटने वालों से बदला न ले सके उसे भाई कहलाने का कोई अधिकार नहीं ? आखिर बहिन भाई के हाथ में राखी क्यों बांधती है ? इसीलिए न कि समय पड़ने पर भाई उसकी रक्षा करें कर्नल रंजीत का लिखा यह उपन्यास एक ऐसे भाई की कहानी है जिसने अपनी बहिन की आबरू पर हाथ डालने वाले पापी दरिन्दों को एक-एक कर मौत के घाट उतारकर अपने इन्तकाम का बदला लिया। जिसने समाज में पल रहे इन कीड़ों को चुन-चुनकर अपनी गोली का निशाना बनाया ताकि सफेदपोश घिनौने व्यक्ति फिर किसी की बहिन की आबरू पर हाथ नहीं डाल सकें। क्या मेजर बलवंत इस साजिश का पर्दाफाश कर पाएगा?



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