Description
गुलामों का देश क्या कोई देश सोने से समृद्ध होकर भी अपनी जनता को गुलाम बना सकता है? और क्या एक ऐसा व्यक्ति, जो स्वयं शासक वर्ग से आता है, सात लाख शोषित लोगों की आज़ादी के लिए अपनी जान दाँव पर लगा सकता है? ‘गुलामों का देश’ जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा का रोमांच, साहस, राजनीति, विज्ञान और मानवीय संघर्ष से बुना हुआ उपन्यास है। कहानी की पृष्ठभूमि है सोणारिका—सोने की खानों से भरपूर एक ऐसा द्वीप, जहाँ जनता से बेगार कराई जाती है, उन्हें वेतन नहीं मिलता और सुल्तान तथा उसके समर्थक ऐशो-आराम की जिंदगी जीते हैं। इसी व्यवस्था के विरुद्ध आवाज उठाता है यूसुफ बिन अमान, जो स्वयं सुल्तान के खानदान से है और खनन इंजीनियर बनने के बाद मजदूरों की दयनीय स्थिति देखकर उनके अधिकारों के लिए संघर्ष शुरू कर देता है। उसका विद्रोह उसे मृत्यु-दंड तक पहुँचा देता है और अंततः वह मदद की तलाश में अम्बाद्वीप पहुँचता है। वहीं उसकी मुलाकात होती है रहस्यमय वैज्ञानिक फादर विलियम कृष्ण और विलक्षण व्यक्तित्व वाले जगत से। विज्ञान की अद्भुत तकनीक, साहसिक योजनाएँ, छल, भेष, हास्य और खतरों से भरे अभियानों के बीच अमान और उसके साथियों का लक्ष्य एक ही है—सोणारिका की जनता को गुलामी से मुक्त कराना।



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