Description
जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा ने करीब पांच दशक तक धुआंधार लेखन किया। उन्होंने देवकी नंदन खत्री और दुर्गा प्रसाद खत्री काल के बाद हिंदी जासूसी साहित्य में आई रिक्तता को नया आयाम देने का काम किया। उनका एक दौर था, जो आज भी प्रासंगिक बना हुआ है। वह जितनी संजीदगी के साथ समाज का बिंब खींचते थे, उतने ही तिलिस्मी अंदाज में कल्पनाओं की मृगमरीचिका भी बुनते थे। यही उनको अलग बनाता है। उन्होंने हिंदी पल्प फिक्शन में पश्चिमी प्रभाव से इतर भारतीय पृष्ठभूमि वाले पात्र रचे। उनके चाहने वाले आज भी राजेश, जयंत, जगत, विलियम, भुवन और गोपाली की तिलिस्मी दुनिया में गोते लगाने का मौका नहीं छोड़ते। उनकी जन्म शताब्दी पर छपा यह विशेषांक उसकी एक बानगी है। पुस्तक में उनके रचनाकर्म और जीवन को वरिष्ठ साहित्यकारों से लेकर स्वजन और आम पाठकों के नजरिए से प्रस्तुत किया गया है। चर्चित उपन्यासों के अंश भी शामिल हैं। कुल जमा यह पुस्तक जासूसी दुनिया के जनप्रिय लेखक को समझने में ‘गागर में सागर’ का काम करती है।



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