Description
देश में चुनाव का माहौल है, लेकिन पर्दे के पीछे एक ऐसा घातक षड्यंत्र रचा जा रहा है जो पूरे भारत को विनाश की आग में झोंक सकता है। भारतीय सीक्रेट सर्विस का जांबाज़ जासूस विजय दुश्मनों के गढ़ में घुसकर एक रहस्यमय संगठन की परतें खोलता है, जहाँ हर कदम पर विश्वासघात, यातनाएँ और मौत उसका इंतज़ार कर रही हैं। क्या विजय देश को बमों की भयावह साज़िश से बचा पाएगा? ‘बमों की चोरी’ वेद प्रकाश काम्बोज का रोमांच, रहस्य और देशभक्ति से भरपूर तेज़-रफ्तार जासूसी उपन्यास है।



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