Description
शोभापुर की सुनसान रात… एक वीरान वेटिंग रूम… और एक ऐसा रहस्य, जो इंसानी चेहरों के पीछे छिपे “भेड़ियों” को बेनकाब करने वाला है। केन्द्रीय खुफिया विभाग का जासूस राजेश एक ऐसे मामले की तहकीकात में पहुंचता है, जो सिर्फ अपराध नहीं – बल्कि समाज की सड़ी हुई सच्चाइयों से जुड़ा है। सामने है एक रहस्यमयी नाम-रमिया, जिसे कानून डकैत कहता है… मगर क्या वह सच में अपराधी है? गांव के लालची साहूकार, विश्वासघात, अन्याय और शोषण की आग में झुलसी एक लड़की… और उसका बदला- जो धीरे-धीरे एक कहानी नहीं, एक आंदोलन बन जाता है। हर पन्ने के साथ खुलता है एक नया सच-क्या रमिया अपराधी है… या न्याय की आखिरी उम्मीद ? क्या इंसान सच में इंसान है… या भेड़िया ? रहस्य, रोमांच, सामाजिक सच्चाई और न्याय की लड़ाई से भरा यह उपन्यास आपको झकझोर देगा।



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