Description
बड़ा नगर एक भयानक साज़िश की आग में जलने वाला है। विदेशी एजेंट, भ्रष्ट नेता, लालची उद्योगपति और सत्ता के भूखे राजनेता मिलकर पूरे प्रदेश को हिंसा में झोंकने की तैयारी कर चुके हैं। हर चेहरा नकाब में है, हर मोड़ पर विश्वासघात और हर कदम पर मौत मंडरा रही है। ऐसे समय में जासूस राजेश, बागारोफ़, चक्रम और 3-ई टीम इस खतरनाक षड्यंत्र को रोकने की दौड़ में उतरते हैं। रहस्य, रोमांच और राजनीतिक साज़िशों से भरपूर “आगे भी अंधेरा पीछे भी अंधेरा” अंत तक पाठकों को बाँधे रखता है।



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