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Description

क्या ईमानदारी की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है? कुछ रिश्ते खून के नहीं होते, फिर भी जिंदगी का सबसे मजबूत सहारा बन जाते हैं। लेकिन जब दोस्ती के बीच दौलत, लालच और भ्रष्टाचार आ जाए, तो वही रिश्ता सबसे गहरा दर्द दे सकता है। ‘दर्द’ एक ईमानदार पुलिस इंस्पेक्टर सुशीलकुमार की रोमांचक कहानी है, जो अपने फर्ज और सिद्धांतों के लिए किसी भी कीमत पर समझौता करने को तैयार नहीं है। जब वह साबुन के पैकेटों में छिपाकर की जा रही हेरोइन और कोकीन की तस्करी का पर्दाफाश करता है, तो अपराध की दुनिया में हलचल मच जाती है। इस खतरनाक साजिश के तार बड़े-बड़े रसूखदार लोगों से जुड़े हैं। एक ओर है जागीरदार शिवाजीतसिंह की चालाकियां, तो दूसरी ओर सुशीलकुमार का जिगरी दोस्त ए.सी.पी. महेन्द्रकुमार, जो धीरे-धीरे उसके सिद्धांतों के विरुद्ध खड़ा हो जाता है।
दोस्ती टूटती है, विश्वास बिखरता है और एक ईमानदार अफसर को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जहां सच और झूठ, कानून और अपराध तथा इंसानियत और बदले के बीच की रेखा धुंधली होने लगती है।

क्या सुशीलकुमार अपने सिद्धांतों की रक्षा कर पाएगा? क्या विश्वासघात करने वालों को उनके कर्मों का परिणाम मिलेगा? और क्या दर्द से भरी इस कहानी में न्याय की जीत होगी? ‘दर्द’ दोस्ती, ईमानदारी, अपराध, सत्ता के दुरुपयोग और प्रतिशोध की एक रोमांचक दास्तान है, जो पाठकों को अंत तक बांधे रखने का वादा करती है।

अगर आपको हिंदी क्राइम थ्रिलर, जासूसी उपन्यास और रहस्य, सस्पेंस व भावनाओं से भरी कहानियां पसंद हैं, तो यह उपन्यास आपके लिए है।