Description
‘ढोल की पोल’ ओमप्रकाश शर्मा का एक तीखा, व्यंग्यात्मक और जासूसी रंग से सराबोर उपन्यास है, जिसमें बड़े-बड़े चेहरों के पीछे छिपे असली चेहरों को बेनकाब किया गया है। इस उपन्यास में “ढोल” एक प्रतीक है — ऊपर से चमकदार, लेकिन अंदर से खोखला।
‘ढोल की पोल’ एक रोमांचक यात्रा है, जो यह बताती है कि बाहरी चमक-दमक पर मत जाइए — असली पोल तो अंदर से खुलती है, जब कोई उसे बजाकर सुनता है।




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