Description
एक कुख्यात शिकारी…
जो जंगलों में जानवरों की ही नहीं, इंसानों की भी जान लेता था…
जिसे मारा गया था, पर अब उसकी आत्मा वापस लौट आई है।
लोग कहते हैं—“अब शिकारी नहीं, उसका प्रेत शिकार करता है!”
“शिकारी का प्रेत” एक रहस्य, डर और सस्पेंस से लबरेज़ थ्रिलर है। इसमें ओम प्रकाश शर्मा ने जंगल की भयावहता, अंधविश्वास और अपराध की परतों को बड़ी कुशलता से एकसाथ बुना है।
“शिकारी का प्रेत” एक तेज़ रफ्तार जासूसी उपन्यास है, जिसमें जंगल, भय, छल और खून की गंध मिलती है।



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