Description
मनोहरगढ़ की शाही विरासत… चार करोड़ का रहस्यमयी खजाना… और उस खजाने पर नजर गड़ाए चार ऐसे “सांप”, जो किसी भी हद तक जा सकते हैं! बीमार होते महाराज देवसिंह और उनकी लालची संतानों के बीच छिड़ी विरासत की जंग, अचानक खतरनाक मोड़ ले लेती है। इसी बीच एक गबन, एक फरार अपराधी और राजमहल के भीतर छिपे षड्यंत्रों की परतें खुलने लगती हैं। मामला इतना उलझ जाता है कि केन्द्रीय खुफिया विभाग का जासूस जगन खुद इस खेल में कूद पड़ता है-जहाँ हर चेहरा संदिग्ध है और हर रिश्ता छल से भरा। क्या खजाना सच में सुरक्षित है… या किसी ने पहले ही उस पर कब्जा जमा लिया है? कौन हैं वे “चार सांप” जो इस खेल को चला रहे हैं? और क्या सच सामने आने से पहले कोई खून-खराबा होगा ?



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