Description
होटल की नर्तकी एक नर्तकी की रहस्यमय मौत… एक बंद हो चुकी हत्या की फाइल… और एक ऐसा जासूस, जो सच सामने लाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है! लखनऊ के आलीशान होटल स्वप्नलोक की नर्तकी नाजनीन की लाश गोमती नदी में मिलती है। पुलिस इसे आत्महत्या मानकर मामला बंद कर देती है, लेकिन नाजनीन की माँ परवीन को यकीन है कि उसकी बेटी की हत्या हुई है। आखिरकार मामला केंद्रीय खुफिया विभाग तक पहुँचता है और जांच की जिम्मेदारी मिलती है तेज-तर्रार, बेबाक और अपने अनोखे अंदाज़ के लिए मशहूर जासूस जगन को। जगन होटल पहुँचते ही मालिक, मैनेजर और नर्तकियों से पूछताछ शुरू कर देता है। हर व्यक्ति के पास अपनी कहानी है, हर चेहरा कुछ छिपा रहा है और हर सुराग किसी नए शक को जन्म देता है। नाजनीन की जिंदगी से जुड़े नामों में सबसे रहस्यमय है मिर्जा खसखस, जिसके साथ नाजनीन के संबंधों की चर्चा सामने आती है। लेकिन क्या मिर्जा ही हत्यारा है?
या होटल की चमक-दमक के पीछे कोई और खतरनाक राज छिपा है? जगन कभी सख्त अफसर बनकर, तो कभी भेष बदलकर सुराग तलाशता है। उसके सामने सिर्फ एक हत्या का रहस्य नहीं, बल्कि झूठ, प्रेम, लालच, छल और अपराध के ऐसे जाल खुलते जाते हैं, जिसमें शिकारी और शिकार की पहचान करना भी मुश्किल हो जाता है। ओमप्रकाश शर्मा की लोकप्रिय जगत-जगन श्रृंखला का यह रोमांचक उपन्यास आपको आखिरी पन्ने तक यह सोचने पर मजबूर करेगा
नाजनीन का असली कातिल आखिर कौन है? होटल की नर्तकी — रहस्य, रोमांच और जासूसी का ऐसा सफर, जिसका सच अंत तक छिपा रहता है। लेखक: जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा श्रृंखला: जगत और जगन सीरीज़ प्रथम प्रकाशन: 1972



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