Description
“परित्याग” गुरुदत्त द्वारा रचित एक संवेदनशील और मार्मिक उपन्यास है जो स्त्री-पुरुष संबंधों, सामाजिक अपेक्षाओं और आत्मबलिदान की जटिलताओं को उजागर करता है। इस उपन्यास में “परित्याग” (त्याग) केवल किसी वस्तु का या व्यक्ति का त्याग नहीं, बल्कि आत्मा की उस पीड़ा और संघर्ष की कहानी है जो प्रेम, कर्तव्य और आत्म-सम्मान के टकराव में जन्म लेती है।
“परित्याग” उन लोगों के लिए पठनीय है जो साहित्य में गहराई, संघर्ष और आत्मचिंतन की तलाश करते हैं।



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