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₹300.00

Description

‘बिकाऊ हैं, खरीदार चाहिए’ एक तीखा, व्यंग्यात्मक और सशक्त सामाजिक-आपराधिक उपन्यास है जिसमें ओमप्रकाश शर्मा न सिर्फ अपराध की दुनिया की सच्चाई दिखाते हैं, बल्कि उस सड़ी-गली व्यवस्था का चेहरा भी बेनकाब करते हैं — जहाँ हर चीज़ बिकाऊ है, बस सही दाम और सही ग्राहक चाहिए।

यह कहानी नायक और खलनायक की नहीं — यह उस “मूल्य” की कहानी है जो आज की दुनिया में हर चीज़ पर चिपका हुआ है।