Skip to content

₹225.00

Description

हर इंसान का एक सपना होता है…
कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई अफसर, कोई कलाकार, तो कोई बस सम्मानित ज़िंदगी जीना चाहता है।
लेकिन क्या हर सपना पूरा होता है?
और जब सपने टूटते हैं… तब इंसान क्या बनता है?

“अपने-अपने सपने” एक गहराई से लिखा गया सामाजिक उपन्यास है, जिसमें लेखक ने आदर्शों, संघर्षों, और महत्वाकांक्षाओं की टकराहट को बेहद सजीव रूप में प्रस्तुत किया है।