Description
पुरानी दिल्ली की एक रहस्यमयी हवेली… जमीन के नीचे दबा अरबों का खजाना… और एक ऐसा ढोंगी स्वामी, जिसकी मुस्कान के पीछे छुपा है खतरनाक खेल ! जब धीरज कुमार और उसकी पत्नी शुभा खजाने की तलाश में “स्वामी सत्यवादी” के जाल में फँसते हैं, तो उनका जीवन उलझ जाता है छल, विश्वासघात और वासना की साजिशों में। मामला इतना पेचीदा हो जाता है कि पहुँचता है केन्द्रीय खुफिया विभाग तक-जहाँ जगन और बंदूक सिंह को सौंपा जाता है यह सनसनीखेज केस। लेकिन सच क्या है? क्या स्वामी के पास सचमुच अलौकिक शक्तियाँ हैं… या यह सब एक खतरनाक ठगी का खेल है? और क्या इस खेल में दांव पर सिर्फ खजाना है-या किसी की जान भी ?



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