Description
मेजर बलवंत सीरीज पर्दे के पीछे रात का सन्नाटा… एक वीरान बंगला… और अंधेरे को चीरती एक औरत की दिल दहला देने वाली चीख… एक अनजान नकाबपोश युवक समय रहते एक असहाय महिला की इज्जत बचा लेता है, लेकिन यह तो उस भयानक खेल की केवल शुरुआत है। वर्षों पुरानी दुश्मनी, प्रतिशोध की आग, रहस्यमयी फोन कॉल, अपहरण की साज़िश और एक ऐसा अदृश्य दुश्मन, जो हर वार पर्दे के पीछे से करता है। शालिनी और उसका परिवार लगातार मौत के साये में घिरते जाते हैं। हर मोड़ पर एक नया चेहरा सामने आता है, लेकिन असली खिलाड़ी कभी दिखाई नहीं देता। कौन है वह शख्स जो परछाइयों से पूरी बाज़ी खेल रहा है? और आखिर किस राज को छिपाने के लिए इतनी जानें दांव पर लगी हैं? रहस्य, रोमांच, एक्शन और अप्रत्याशित मोड़ों से भरपूर कर्नल रंजीत का यह उपन्यास आपको अंतिम पृष्ठ तक बाँधे रखेगा। क्योंकि सच हमेशा सामने नहीं होता… कई बार वह होता है- “पर्दे के पीछे!”



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