Description
अंधेरी रात… नदी किनारे गूंजती कदमों की आहट और नकाबपोश साजिश की शुरुआत एक टेढ़ा मकान जिसके बारे में कहा जाता है- वहाँ रहता है भूत या मौत ? एक कंजूस बूढ़ा… जिसकी रहस्यमयी मौत एक औरत… जो बंद कमरे में जिंदा जल गई लेकिन बिस्तर तक नहीं जला और फिर… हर रात सुनाई देती है-चीखें सिसकियाँ बदले की आवाजें क्या सच में कोई भूत है? या छुपा है इंसानों से भी खतरनाक खेल ? जब केस आता है मेजर बलवंत के हाथ तो खुलते हैं तहखाने जहाँ मिलती हैं- हड्डियाँ खून और खौफनाक प्रयोग यह सिर्फ एक हत्या नहीं, यह है एक ऐसा रहस्य, जहाँ हर सच जानलेवा है “टेढ़ा मकान” जहाँ दीवारें भी छुपाती हैं राज… और हर दरवाजे के पीछे है मौत !



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