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Description

एक रहस्यमयी पत्र से शुरू होता है एक ऐसा मामला, जिसमें हत्या को आत्महत्या का रूप देकर अपराधियों को बचा लिया गया है। लखनऊ के उद्योगपति गणेश प्रसाद अपनी बेटी ज्योति की संदिग्ध मृत्यु की जांच की गुहार लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुँचते हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बंद कमरे में मिली लाश और मृतका का अजीबोगरीब पत्र—हर सुराग कहानी को और उलझा देता है। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं होता। ज्योति की मौत के कुछ ही दिनों बाद उसकी सास रजनी की लाश नहर में मिलती है। दोनों घटनाओं की रात परिवार का एक प्रमुख सदस्य महल में मौजूद नहीं था और सुनसान पड़े इच्छापुर पैलेस के भीतर छिपे रहस्य पुलिस के लिए चुनौती बन चुके हैं। राजेश इस केस की तह तक जाने के लिए जयन्त को एक नए रूप में लखनऊ भेजते हैं। जयन्त ‘उत्तमचन्द’ बनकर मामले के मुख्य व्यक्ति संसारचन्द्र से मिलता है। बातचीत में करोड़ों रुपये का कारोबार, किसानों का बकाया, प्रभावशाली लोगों से संबंध और परिवार में हुई रहस्यमयी मौतों की परतें खुलने लगती हैं। क्या ज्योति और रजनी की मौत वास्तव में आत्महत्या थी? इच्छापुर पैलेस में आखिर कौन-सा राज छिपा है? और राजेश की टीम इस खतरनाक साजिश तक कैसे पहुँचेगी? ओमप्रकाश शर्मा का यह रोमांचक जासूसी उपन्यास रहस्य, जांच, साजिश और अप्रत्याशित मोड़ों से भरपूर है।