Description
जब अन्याय ज़िंदगी बर्बाद कर दे, तो क्या बदला न्याय दिला सकता है—या एक नई त्रासदी को जन्म देता है? सुरेश एक ईमानदार इंसान है, जो गरीबी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष कर रहा है। बीमार माँ, अपंग बहन और छोटे भाई के भविष्य की चिंता उसके जीवन का हिस्सा है। परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए धन की सख्त आवश्यकता होने के बावजूद वह रिश्वत और बेईमानी का रास्ता अपनाने से इनकार कर देता है। उसका छोटा भाई राजेश एक प्रतिभाशाली विद्यार्थी है।
नीलम का प्रेम उनके बीच की सामाजिक और आर्थिक दूरी को चुनौती देता है। दूसरी ओर, सेठ केदारनाथ के परिवार में शराब, विद्रोह, अपराध और छिपे हुए रहस्यों का जाल गहराता जाता है।
लेकिन अतीत में एक ऐसा भयानक सच छिपा है, जिसने कई ज़िंदगियों को तबाह कर दिया है। जब पुराने अन्याय का बदला लेने की आग भड़कती है, तो निर्दोष लोग भी उसके निशाने पर आने लगते हैं। न्याय और प्रतिशोध के बीच की सीमा धुंधली होने लगती है। फिर गोलियाँ चलती हैं और तहखाने का बंद दरवाज़ा खुलता है। सामने आता है एक ऐसा रहस्य, जो पूरी कहानी को नया मोड़ दे देता है। क्या सच सामने आने से न्याय मिल पाएगा?
क्या बदला बीते हुए अन्याय की भरपाई कर सकता है? और जब नफ़रत सब कुछ मिटाने लगे, तो क्या क्षमा ही सबसे बड़ा प्रतिशोध बन सकती है? ‘अन्याय’ मनोज द्वारा रचित एक रोमांचक सामाजिक उपन्यास, जो ईमानदारी, गरीबी, प्रेम, पारिवारिक संघर्ष, अपराध, विश्वासघात और न्याय की जटिलताओं को सामने लाता है। यह कहानी पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है—जब अन्याय का जवाब देने की बारी आती है, तो इंसान कहाँ तक जा सकता है, इससे पहले कि वह स्वयं अन्याय करने लगे?


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