Description
क्या एक ईमानदार डॉक्टर पूरे गाँव की तक़दीर बदल सकता है? कुछ सपने सिर्फ अपनी मंज़िल तक पहुँचने के लिए नहीं, बल्कि दूसरों की ज़िंदगी बदलने के लिए देखे जाते हैं। सूरज ने अपनी माँ को इलाज के अभाव में खो दिया था। उसी दिन उसने प्रण लिया कि वह डॉक्टर बनकर किसी गरीब को उस दर्द से नहीं गुजरने देगा, जिसने उसका अपना संसार उजाड़ दिया था। वर्षों के संघर्ष के बाद सूरज सपना गाँव के सरकारी अस्पताल में डॉक्टर बनकर पहुँचता है।
लेकिन वहाँ उसका सामना एक ऐसी व्यवस्था से होता है, जहाँ इलाज के नाम पर लापरवाही, भ्रष्टाचार और गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाया जाता है। गाँव वाले अस्पताल से नफरत करते हैं और धनीराम वैद्य को अपना रक्षक मानते हैं। उसके प्रभाव, गुंडों की धमकियों और भ्रष्ट कर्मचारियों के बीच सूरज के लिए अपना कर्तव्य निभाना आसान नहीं है। इस कठिन संघर्ष में उसका साथ देता है रविकान्त एक ऐसा शिक्षक, जो वर्षों से गाँव में फैले अन्याय को समाप्त करने का सपना देख रहा है।
दोनों मिलकर गाँव का विश्वास जीतने और शोषण की जड़ों को चुनौती देने का संकल्प लेते हैं। लेकिन क्या ईमानदारी और साहस के बल पर इतनी शक्तिशाली व्यवस्था को बदला जा सकता है? क्या सूरज गरीबों को उनका अधिकार दिला पाएगा, या अन्याय की ताकतें उसे उसकी मंज़िल तक पहुँचने से पहले ही रोक देंगी?
‘मुसाफ़िर’ संघर्ष, मानवता, ईमानदारी और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरक कहानी है।
यह उपन्यास आपको सोचने पर मजबूर करेगा कि बदलाव की शुरुआत करने के लिए आखिर कितनी हिम्मत चाहिए। पढ़िए ‘मुसाफ़िर’ एक ऐसे डॉक्टर की कहानी, जिसकी मंज़िल सिर्फ इलाज करना नहीं, बल्कि इंसानियत को बचाना है।


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