Description
यह उपन्यास अपराध, जालसाजी और जासूसी की दुनिया को उस बारीकी से उजागर करता है जहाँ असली और नकली की पहचान ही सबसे बड़ा रहस्य बन जाती है।
“नकली हीरे जाली नोट” केवल एक जासूसी उपन्यास नहीं बल्कि आज के समाज में मौजूद छल और धोखे की परतों को खोलने वाली कहानी है। वेद प्रकाश काम्बोज अपनी पारखी नज़र और समाज पर व्यंग्यात्मक शैली के लिए प्रसिद्ध हैं — जो इस उपन्यास में भी बखूबी झलकता है।



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