Description
सुमेरपुर का एक छोटा सा अखबार… सच्चाई की आवाज… और उस आवाज को हमेशा के लिए खामोश कर देने वाली एक बेरहम हत्या। ईमानदार पत्रकार राकेश, जो हमेशा मजदूरों, किसानों और आम जनता के हक में लिखता था अचानक एक सुनसान पुल पर गोली का शिकार बन जाता है। यह सिर्फ एक हत्या नहीं… यह सच की आवाज को दबाने की साजिश है। पुलिस की नाकामी के बाद मामला पहुँचता है केन्द्रीय खुफिया विभाग तक-जहाँ से जासूस राजेश, जगन, और बन्दूक सिंह इस रहस्य की परतें खोलने निकलते हैं। हर सुराग एक नए शक की ओर इशारा करता है- क्या यह राजनीतिक साजिश है ? क्या उद्योगपतियों की साजिश ? या फिर कोई ऐसा दुश्मन, जो सामने कभी आया ही नहीं? सच, सत्ता और साजिश के इस खतरनाक खेल में-क्या हत्यारे तक पहुँच पाएंगे जासूस? या सच हमेशा के लिए दफन हो जाएगा ?



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