Description
कमालपुर के ऐतिहासिक यमुना महल में एक ऐसी रहस्यमयी घटना घटती है, जिसे देखकर अनुभवी पुलिस इंस्पेक्टर राजशेखर भी इसे “चमत्कार” कहने को मजबूर हो जाते हैं। डॉक्टर विजय कुमार की पत्नी तरंग कड़ी सुरक्षा के बीच आधी रात को रहस्यमय ढंग से गायब हो जाती है। डॉक्टर के अनुसार उसे लोहे की विद्युत-प्लेटों से ढका एक विचित्र व्यक्ति उठाकर ले गया और उसके बाद छत से विमान जैसी आवाज भी सुनाई दी। इस असंभव-सी पहेली को सुलझाने के लिए सामने आते हैं प्रसिद्ध निजी जासूस माधव जी। लेकिन जैसे-जैसे वे मामले की तह तक पहुँचते हैं, तरंग के अतीत, उसके पिता की संदिग्ध मृत्यु और उसके अपहरण के पीछे छिपी साजिश के नए-नए रहस्य सामने आने लगते हैं। कहानी आगे बढ़ते-बढ़ते कमालपुर से दूर समुद्र और स्टीमर तक पहुँचती है, जहाँ राजेश, माधव जी, तरंग, रजनी और कैप्टेन कान्त एक खतरनाक जाल में फँस जाते हैं। अंततः राजेश की भूमिका भी इस रोमांचक रहस्य को निर्णायक मोड़ तक पहुँचाती है। क्या तरंग को खोज पाना संभव होगा? कौन है इस पूरे षड्यंत्र का सूत्रधार? और आखिर कमालपुर में हुआ वह “चमत्कार” वास्तव में क्या था? ओमप्रकाश शर्मा का यह रोमांचक जासूसी उपन्यास रहस्य, अपहरण, साज़िश और साहसिक घटनाओं से भरपूर है।



Reviews
There are no reviews yet.