गुरुदत्त

गुरुदत्त हिंदी के प्रसिद्ध और बहुआयामी लेखक थे जिन्होंने लगभग 250 से अधिक पुस्तकें लिखीं। उनका लेखन मुख्य रूप से संयुक्त परिवारों, मध्यवर्गीय जीवन, राजनीतिक चेतना, और सामाजिक मूल्यों पर केंद्रित था। उन्होंने भारतीय समाज की बदलती तस्वीर, पीढ़ियों के बीच के टकराव, और संबंधों की गहराइयों को बेहद सहज और यथार्थपूर्ण भाषा में प्रस्तुत किया।

गुरुदत्त की रचनाएँ पाठकों को न केवल मनोरंजन देती हैं, बल्कि समाज के गूढ़ प्रश्नों पर विचार करने के लिए प्रेरित भी करती हैं। वे एक ऐसे लेखक थे, जिन्होंने जनसामान्य को केंद्र में रखकर साहित्य को जीवंत बनाया।

गुरुदत्त संग्रह

Vidhur / विधुर

Vidhur / विधुर

Vidhur / विधुर

Rs. 250.00
Sampda / सम्पदा

Sampda / सम्पदा

Sampda / सम्पदा

Rs. 250.00
PARITYAG / परित्याग

PARITYAG / परित्याग

PARITYAG / परित्याग

Rs. 250.00
Andhe Ki Lathi / अन्धे की लाठी

Andhe Ki Lathi / अन्धे की लाठी

Andhe Ki Lathi / अन्धे की लाठी

Rs. 300.00