Description
हिमालय की ऊँचाइयों में छिपी एक रहस्यमयी झील जहाँ सैकड़ों कंकाल सदियों से बर्फ के नीचे सोए हुए हैं। वे कौन थे? वे वहाँ क्यों आए? … और उनकी मृत्यु इतनी भयावह क्यों थी? यह केवल एक ऐतिहासिक रहस्य नहीं, बल्कि समय, विज्ञान और आस्था के बीच छिपी एक अनकही कहानी है। एक ओर हैं सदियों पुरानी लोककथाएँ-देवी का क्रोध और शापित भूमि। दूसरी ओर है आधुनिक विज्ञान-डीएनए, कार्बन डेटिंग और फॉरेंसिक विश्लेषण। निकिन जब दोनों एक ही दिशा में इशारा करते हैं तो क्या वह संयोग होता है, या किसी बड़े सत्य की झलक ? यह उपन्यास आपको एक ऐसी यात्रा पर ले जाएगा जहाँ हर उत्तर के साथ एक नया प्रश्न जन्म लेता है, और हर रहस्य सुलझने के बाद और गहरा हो जाता है। रूपकुंड… जहाँ बर्फ के नीचे केवल हड्डियाँ नहीं, बल्कि एक अधूरी कहानी दबी हुई है। …और जब आप उस झील के सामने खड़े होंगे तो शायद आपको भी एक आवाज सुनाई दे- “क्या तुम सच जानना चाहते हो?”


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