Description
परदे पर दिखता है इश्क़, मोहब्बत, इंसाफ़…
लेकिन परदे के पीछे चलती है साज़िश, धोखा, अपराध…
“परदे के आगे, परदे के पीछे” एक शानदार सामाजिक-जासूसी उपन्यास है, जिसमें लेखक ओम प्रकाश शर्मा ने सिनेमा, राजनीति और अपराध की दुनिया की परतों को बेधड़क खोला है।
“परदे के आगे, परदे के पीछे” एक बेहतरीन थ्रिलर है, जो पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम जो देखते हैं—वो सच नहीं होता।



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