Description
प्रेमचंद का गबन मध्यमवर्गीय जीवन, दिखावे, लालच और सामाजिक दवार्ता की मार्मिक कहानी है। जालपा गहनों की इच्छाओं में उलझी रहती है, और उसका पति रमानाथ अपनी सीमित आय होते हुए भी उसकी अपेक्षाएँ पूरी करने की कोशिश करता है। धीरे-धीरे वह कर्ज और गलत रास्तों में फॅसता जाता है. जिसके कारण उसके जीवन में संकट और अपराधबोध बढ़ता है। जालपा धीरे-धीरे समझती है कि सच्चा सुख आडंबर में नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और सरलता में है। उपन्यास मानव स्वभाव, सामाजिक दिखावे और नैतिक मूल्यों के संघर्ष को गहराई से प्रस्तुत करता है।



Reviews
There are no reviews yet.