Description
यह उपन्यास गोपाली के चमनगढ़ आने से शुरू होता है, जहाँ वह एक पुराने रिश्ते के कारण एक सप्ताह रुकता है और कई लोगों से मिलकर पुरानी स्मृतियाँ ताज़ा करता है। इस दौरान वह अंग्रेज दुश्मनों और उनकी साज़िशों में फँस जाता है, जिनका संबंध रूबी और नॉर्ममन जैसे पात्रों से है । गोपाली चमनगढ़ का जाना-पहचाना और बहादुर व्यक्ति है, इसलिए वह सत्य उजागर करने और देशभक्ति व न्याय के मूल्यों की रक्षा में जुट जाता है । कहानी में रहस्य, एक्शन और सामाजिक सरोकारों का रोचक संगम है, जहाँ गोपाली दुश्मनों के जाल से निकल कर न्याय का मार्ग चुनता है।



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