Description
एक हत्या… एक निर्दोष को फाँसी की सजा… और एक ऐसी गुत्थी, जिसे सुलझाने के लिए दांव पर लगी है पूरी जिंदगी! लखनऊ में मुकुन्दलाल की हत्या के आरोप में चित्रकार चन्द्रकान्त को मृत्यु-दण्ड मिल चुका है। चन्द्रकान्त स्वयं को निर्दोष बताता है, लेकिन उसके विरुद्ध प्रस्तुत किए गए प्रमाण इतने मजबूत हैं कि अदालत का फैसला उसके खिलाफ जाता है। तभी उसकी पैरवी करने वाली शारदा पुराने मामले को चुनौती देती है और केंद्रीय खुफिया विभाग के तेज-तर्रार जासूस राजेश से दोबारा जांच की मांग करती है। राजेश के सामने सिर्फ एक हत्या का रहस्य नहीं, बल्कि शारदा के अटूट विश्वास, चन्द्रकान्त के अतीत और मुकदमे में सामने आए प्रमाणों की एक उलझी हुई कड़ी है। क्या चन्द्रकान्त सचमुच हत्यारा है? अगर वह निर्दोष है, तो असली अपराधी कौन है? और राजेश क्या फाँसी के फंदे तक पहुँच चुके इस रहस्य की सच्चाई सामने ला पाएगा?



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